Plasi ka yuddh (1757)Notes for class 10th for class 10th
इसी अवसर का फायदा उठाकर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने नवाब के विरोधियों की साजिश में भाग लेना शुरू कर दिया। उसी समय यूरोपीय कंपनियां मुगल सम्राटों से प्राप्त फरमानो द्वारा दी गई व्यापारिक सुविधाओं का दरुपयोग कर रही थी । साथ ही, वे अपनी कोलकाता स्थित बस्तियो की किलेबंदी भी करने लगी थी।
जब सिराजुद्दौला को इसकी सूचना मिली, तो उसने अंग्रेजी व्यापारियों द्वारा की जा रही सैन्य तैयारियों पर प्रतिबंध लगा दिया। अंग्रेजों ने नवाब के आदेश की अवहेलना की । इससे क्रोधित होकर नवाब ने कोलकाता पर आक्रमण किया और अंग्रेजों को पराजित कर दिया ।
इस घटना की सूचना जब मद्रास (चेन्नई ) पहुंची , तो लार्ड क्लाइव सैनिक बल के साथ कोलकाता पहुंच और पुनः अंग्रेजों का अधिकार हो गया। इसके बाद नवाब और अंग्रेजों के बीच 9 फरवरी 1757 को अलीनगर की संधि हुई । इस संधि के अनुसार अंग्रेजों को बंगाल बिहार और उड़ीसा में बिना चुंगी दिए व्यापार करने का अधिकार मिल गया।
किंतु लॉर्ड क्लाइव इससे संतुष्ट नहीं था। वह बंगाल में अंग्रेजी शासन स्थापित करना चाहता था। अतः उसने नवाब के विरोधियों से गुप्त षड्यंत्र करना आरंभ कर दिया। नवाब का सेनापति मीरजाफर स्वयं बंगाल का नवाब बनना चाहता था । अंग्रेजों ने उसे नवाब बनाने एवं अन्य सुविधाएं देने का वचन दिया । इस षड्यंत्र में रायदुर्लभ , जगतसेठ और अमिचंद्र जैसे व्यापारी व्यापारिक लाभ के लिए शामिल थे।
षड्यंत्र सफल होने के बाद क्लाइव ने नवाब पर संधि भंग करने का आरोप लगाकर एक बड़ी सेना लेकर बंगाल की राजधानी मुर्शिदाबाद की ओर बढ़ा । जब नवाब को इसकी सूचना मिली , तब उसने प्रतिरोध करने हेतु अपनी सेना के साथ क्लाइव के विरुद्ध कूच कर दिया।
23 जून 1757 को अंग्रेजों और सिराजुद्दौल की सेना आमने-सामने हुई । नवाब ने अपने सेनापति मीरजाफर को अंग्रेजों पर आक्रमण की पहल करने को कहा , किन्तु मीरजाफर निष्क्रिय खड़ा रहा। इससे सिराजुद्दौला को उसके विश्वासघात का आभास हो गया और वह षड्यंत्र से बचने के लिए लड़ाई का मैदान छोड़ कर भाग गया। नबाब के भाग जाने से उसकी सेना में भगदड़ मच गई।
अंततः नवाब को बंदी बना लिया गया और मीरजाफर के पुत्र ने उसकी हत्या कर दी। मीरजाफ़र को अंग्रेजों ने धोखा देने के पुरस्कार में बंगाल का नवाब बना दिया और मीरजाफर ने अंग्रेजों को बहुत सा धन व जागीर दी ।
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