तिलका मांझी: आदिवासी वीर और अंग्रेजों के विरुद्ध पहला संगठित संघर्ष
तिलका मांझी: आदिवासी वीर और अंग्रेजों के विरुद्ध पहला संगठित संघर्ष
तिलका मांझी कौन थे?
तिलका मांझी (1750–1785) संथाल जनजाति के महान नेता थे, जिन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचारों के खिलाफ संगठित संघर्ष किया। वे आधुनिक भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध सबसे शुरुआती आदिवासी विद्रोहियों में गिने जाते हैं।
🔹 संघर्ष के प्रमुख कारण
अंग्रेज अधिकारियों और जमींदारों द्वारा आदिवासियों का शोषण
भारी कर वसूली और भूमि पर कब्ज़ा
परंपरागत आदिवासी जीवन में हस्तक्षेप
🔹 तिलका मांझी का आंदोलन
धनुष-बाण और गुरिल्ला पद्धति का प्रयोग
अंग्रेज अधिकारियों पर हमले
संथाल समुदाय को एकजुट करना
🔹 ब्रिटिश प्रतिक्रिया
कंपनी सरकार ने सेना भेजी
1785 में तिलका मांझी को गिरफ्तार किया गया
उन्हें फाँसी देकर विद्रोह दबाया गया
🔹 ऐतिहासिक महत्व
आदिवासी प्रतिरोध की मजबूत नींव
बाद के जनजातीय आंदोलनों को प्रेरणा
स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों की भूमिका उजागर
निष्कर्ष
तिलका मांझी का बलिदान यह दिखाता है कि स्वतंत्रता की लड़ाई में आदिवासी समाज ने भी निर्णायक भूमिका निभाई।
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