दामिन-इ-कोह क्या था? संथाल क्षेत्र की विशेष व्यवस्था का इतिहास
दामिन-इ-कोह क्या था? संथाल क्षेत्र की विशेष व्यवस्था का इतिहास
दामिन-इ-कोह क्या था?
दामिन-इ-कोह एक विशेष क्षेत्र था जिसे ब्रिटिश सरकार ने 1832 में संथाल जनजाति के लिए निर्धारित किया था। यह क्षेत्र वर्तमान झारखंड के संथाल परगना में स्थित था। इसका उद्देश्य संथालों को बसाकर कृषि को बढ़ावा देना था।
🔹 दामिन-इ-कोह की स्थापना क्यों हुई?
राजमहल पहाड़ियों में शांति स्थापित करना
संथालों को स्थायी रूप से बसाना
कृषि उत्पादन बढ़ाना
राजस्व (Revenue) में वृद्धि करना
🔹 ब्रिटिश नीति और समस्याएँ
शुरू में संथालों को भूमि दी गई
बाद में जमींदारों और साहूकारों का हस्तक्षेप बढ़ा
अत्यधिक कर वसूली शुरू हुई
शोषण और ऋणग्रस्तता बढ़ी
🔹 संथाल विद्रोह से संबंध
दामिन-इ-कोह क्षेत्र में बढ़ते शोषण के कारण 1855 में संथाल विद्रोह हुआ।
नेता थे:
सिद्धू
कान्हू
चाँद और भैरव
🔹 ऐतिहासिक महत्व
ब्रिटिश प्रशासन की जनजातीय नीति को समझने में महत्वपूर्ण
संथाल विद्रोह का मुख्य कारण
आदिवासी असंतोष का बड़ा उदाहरण
🔹 निष्कर्ष
दामिन-इ-कोह की व्यवस्था प्रारंभ में विकास के लिए बनाई गई थी, लेकिन बाद में यही नीति शोषण का कारण बनी और संथाल विद्रोह जैसी बड़ी घटना का आधार बनी।
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